2014 से 2026 तक भारत में भ्रष्टाचार कितना बदला? जानिए आसान भाषा में पूरी सच्चाई
भारत में भ्रष्टाचार कम हुआ या बढ़ा? यह सवाल पिछले कई सालों से राजनीति और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है। कोई कहता है कि भ्रष्टाचार कम हुआ, तो कोई कहता है कि भ्रष्टाचार पहले से ज्यादा बढ़ गया है।
- 2014 में भारत का स्कोर कितना था?
- लेकिन बीच में भारत का स्कोर 40 भी हुआ था
- तो क्या भ्रष्टाचार बढ़ गया?
- आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है?
- भ्रष्टाचार सिर्फ रिश्वत लेने का नाम नहीं है
- Electoral Bonds का मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
- क्या ज्यादा भ्रष्टाचार के केस मतलब भ्रष्टाचार ज्यादा?
- गिरफ्तारी का मतलब दोषी होना नहीं
- 2014 और 2025 में सीधी तुलना
- क्या भारत दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश है?
- 2026 का आंकड़ा अभी क्यों नहीं बता सकते?
- तो आखिर सच्चाई क्या है?
लेकिन अगर राजनीतिक बयान छोड़कर आंकड़ों को देखें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारत में भ्रष्टाचार को मापने का कोई ऐसा सरकारी मीटर नहीं है जो बता सके कि देश में भ्रष्टाचार 20 प्रतिशत है या 50 प्रतिशत।
इसलिए दुनिया में भारत की स्थिति समझने के लिए Transparency International का Corruption Perceptions Index यानी CPI काफी इस्तेमाल किया जाता है।
2014 में भारत का स्कोर कितना था?
2014 में भारत का CPI स्कोर 38 अंक था।
यह स्कोर 100 में से होता है।
इसमें 100 का मतलब बहुत कम भ्रष्टाचार और 0 का मतलब बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार माना जाता है।
अब 2025 में भारत का स्कोर 39 अंक है।
यानी 2014 से 2025 तक भारत के स्कोर में केवल 1 अंक का सुधार हुआ।
यह बहुत बड़ा बदलाव नहीं है।
लेकिन बीच में भारत का स्कोर 40 भी हुआ था
यहां एक और महत्वपूर्ण बात है।
भारत का CPI स्कोर 2017 और 2020 में 40 अंक तक पहुंच गया था।
इसके बाद स्कोर नीचे आया।
2024 में भारत का स्कोर फिर 38 हो गया।
2025 में यह थोड़ा बढ़कर 39 हुआ।
इसका मतलब यह हुआ कि पिछले 11 साल में स्थिति लगातार बेहतर नहीं हुई।
कभी सुधार हुआ और फिर गिरावट भी आई।
तो क्या भ्रष्टाचार बढ़ गया?
इस सवाल का सीधा जवाब हां या ना में देना सही नहीं होगा।
CPI के आंकड़े यह नहीं बताते कि भारत में भ्रष्टाचार कितने रुपये का है।
यह भी नहीं बताते कि देश में कितने लोगों ने रिश्वत दी।
यह एक perception यानी लोगों और विशेषज्ञों की धारणा पर आधारित index है।
इसलिए यह कहना गलत होगा कि:
“2014 से भ्रष्टाचार 10 प्रतिशत बढ़ गया।”
ऐसा आंकड़ा CPI से नहीं निकाला जा सकता।
सही बात यह है कि 2014 में भारत का स्कोर 38 था और 2025 में 39 है।
यानी बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है?
इसे आसान उदाहरण से समझिए।
मान लीजिए किसी स्कूल की परीक्षा 100 नंबर की है।
2014 में भारत को 38 नंबर मिले।
2025 में 39 नंबर मिले।
मतलब सिर्फ 1 नंबर का सुधार हुआ।
लेकिन बीच में कभी 40 नंबर भी मिले थे।
इसलिए यह कहना कि भारत की स्थिति बहुत तेजी से सुधरी है, आंकड़ों से साबित नहीं होता।
और यह कहना कि स्थिति पूरी तरह खराब हो गई है, वह भी आंकड़ों से साबित नहीं होता।
भ्रष्टाचार सिर्फ रिश्वत लेने का नाम नहीं है
आम आदमी भ्रष्टाचार को अक्सर रिश्वत से जोड़कर देखता है।
जैसे किसी सरकारी काम के लिए पैसे मांगना।
लेकिन भ्रष्टाचार इससे बड़ा मुद्दा है।
इसमें कई चीजें शामिल हो सकती हैं:
- सरकारी काम में रिश्वत
- सरकारी ठेके में गड़बड़ी
- सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल
- फर्जी बिल
- नियमों का गलत फायदा उठाना
- राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता की कमी
- सरकारी खरीद में अनियमितता
इसलिए किसी देश में भ्रष्टाचार को समझने के लिए सिर्फ रिश्वत के मामलों को देखना पर्याप्त नहीं है।
Electoral Bonds का मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
राजनीतिक फंडिंग को लेकर 2024 में सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला आया।
सुप्रीम कोर्ट ने Electoral Bond Scheme को असंवैधानिक घोषित किया।
कोर्ट के फैसले में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे और लोगों के सूचना के अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए। (api.sci.gov.in)
आसान भाषा में समझें तो सवाल यह था कि राजनीतिक पार्टियों को पैसा कौन दे रहा है, इसकी जानकारी जनता को कितनी होनी चाहिए?
यह फैसला राजनीतिक फंडिंग में transparency यानी पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
लेकिन यहां एक बात बहुत जरूरी है:
Electoral Bonds पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह साबित नहीं करता कि किसी खास पार्टी ने भ्रष्टाचार किया।
दोनों बातों को अलग रखना जरूरी है।
क्या ज्यादा भ्रष्टाचार के केस मतलब भ्रष्टाचार ज्यादा?
जरूरी नहीं।
मान लीजिए किसी साल जांच एजेंसी ने 1,000 मामले दर्ज किए और अगले साल 2,000 मामले दर्ज किए।
इससे सीधे यह साबित नहीं होता कि देश में भ्रष्टाचार दोगुना हो गया।
हो सकता है:
- जांच ज्यादा हुई हो
- शिकायतें ज्यादा आई हों
- पुराने मामलों में कार्रवाई हुई हो
- जांच एजेंसी ज्यादा सक्रिय हुई हो
इसी तरह अगर किसी साल कम मामले दर्ज हुए तो इसका मतलब यह भी नहीं कि भ्रष्टाचार खत्म हो गया।
गिरफ्तारी का मतलब दोषी होना नहीं
यह बात भी आम लोगों के लिए समझना जरूरी है।
अगर किसी व्यक्ति को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया है, तो इसका मतलब यह नहीं कि अदालत ने उसे दोषी साबित कर दिया।
आरोप, जांच, गिरफ्तारी और दोषसिद्धि चार अलग-अलग चीजें हैं।
जब तक अदालत किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराती, उसे कानूनी रूप से दोषी नहीं कहा जा सकता।
इसलिए खबर लिखते समय किसी आरोपी को सीधे “भ्रष्टाचारी” कहना भी सही नहीं है।
2014 और 2025 में सीधी तुलना
आसान भाषा में आंकड़े देखें:
2014: CPI स्कोर – 38/100
2017: 40/100
2020: 40/100
2024: 38/100
2025: 39/100
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत की स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
2014 से 2025 के बीच सिर्फ 1 अंक का net improvement हुआ।
लेकिन बीच में भारत 40 अंक तक भी पहुंचा था।
क्या भारत दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश है?
नहीं।
यह कहना भी गलत होगा।
भारत का CPI score 39 है, लेकिन दुनिया में कई देशों का score इससे काफी कम है।
दूसरी तरफ कई देशों का score भारत से काफी ज्यादा है।
2025 में भारत का score global average 42 से थोड़ा नीचे था। (transparency.org)
इसका मतलब है कि भारत की स्थिति सुधार की गुंजाइश वाली है, लेकिन भारत को दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश कहना आंकड़ों के खिलाफ होगा।
2026 का आंकड़ा अभी क्यों नहीं बता सकते?
यह भी बहुत जरूरी है।
अभी 2026 का Corruption Perceptions Index उपलब्ध नहीं है।
सबसे नया CPI 2025 का है, जिसे फरवरी 2026 में जारी किया गया था।
इसलिए अगर कोई अभी कहता है कि:
“2026 में भारत का corruption score इतना है”
तो उस दावे की जांच जरूर करनी चाहिए।
2026 का पूरा साल खत्म होने के बाद ही उस साल का CPI आने की उम्मीद होगी।
तो आखिर सच्चाई क्या है?
अगर सिर्फ उपलब्ध आंकड़ों की बात करें तो:
2014 में भारत का CPI स्कोर 38 था।
2025 में यह 39 है।
यानी करीब 11 साल में सिर्फ 1 अंक का सुधार।
बीच में स्कोर 40 तक पहुंचा, लेकिन फिर नीचे आया।
इसलिए सबसे ईमानदार जवाब यह है कि भारत में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ है और CPI के हिसाब से पिछले 11 साल में इसमें कोई बहुत बड़ा सुधार भी दिखाई नहीं देता।
लेकिन यह कहना भी सही नहीं होगा कि भ्रष्टाचार कई गुना बढ़ गया है।
उसके लिए अलग और ठोस आंकड़ों की जरूरत होगी।
आम आदमी के लिए एक लाइन में जवाब
2014 से 2025 तक भारत का भ्रष्टाचार स्कोर 38 से 39 हुआ है। यानी सुधार हुआ जरूर है, लेकिन सिर्फ 1 अंक का—और बीच में स्थिति 40 अंक तक पहुंचकर फिर नीचे भी आई।
यही उपलब्ध आंकड़ों से निकलने वाली सबसे सीधी और निष्पक्ष तस्वीर है

