इस आंदोलन की शुरुआत कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने की थी और पिछले महीने 28 जून को इसमें सोनम वांगचुक शामिल हुए थे.
कॉकरोच जनता पार्टी प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता के मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांग रही है. केंद्र सरकार सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर बहुत हरकत में नहीं दिख रही है. लेकिन वांगचुक के अनशन की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी अच्छी ख़ासी है.

अमेरिका के प्रमुख अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने 16 जुलाई की एक रिपोर्ट में लिखा है कि लाखों भारतीय छात्रों के लिए न्याय की मांग कर रहे युवाओं के आंदोलन को वांगचुक की भूख हड़ताल से नई गति मिली है.
28 जून से केवल नमक मिले पानी के सहारे रह रहे वांगचुक ने कहा, “पीड़ित लोग अक्सर अपनी आवाज़ ख़ुद नहीं उठा पाते. इस बार बदलाव यह था कि युवा ख़ुद आगे आकर अपनी आवाज़ उठा रहे थे. ऐसे में मैं उनका समर्थन कैसे नहीं करता?”
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का यह आंदोलन एक कटाक्ष के रूप में शुरू हुआ था. इसकी शुरुआत उस समय हुई, जब भारत के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने बेरोज़गार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी. उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी और तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था. हालांकि बाद में उन्होंने सफ़ाई दी थी और कहा था कि उनकी टिप्पणी की व्याख्या ग़लत तरीक़े से की गई.

सोनम वांगचुक और सीजेपी दोनों ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं. शिक्षा सुधार के लिए लंबे समय से अभियान चला रहे वांगचुक ने बुधवार को प्रदर्शन स्थल से न्यूयॉर्क टाइम्स को फोन पर दिए एक इंटरव्यू में कहा कि सीजेपी का आंदोलन उस संघर्ष से जुड़ा हुआ है, जिसे उन्होंने अपनी युवावस्था में शुरू किया था.
वांगचुक ने कहा, “मैंने आज इस मुद्दे को नहीं चुना है. मैंने इसे 40 साल पहले चुना था, जब मैंने शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का फ़ैसला किया था.”

