6 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली
- जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन अब और तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर दबाव बढ़ाने के लिए 10 अक्टूबर को एक बड़े धरने की चेतावनी दी है। मुख्य बातें
- आज की स्थिति
- 2 और 3 अक्टूबर को क्या हुआ
- प्रदर्शनकारियों की मांग और आरोप
- 10 अक्टूबर का धरना
- राजनीतिक हलचल
- पृष्ठभूमि: जून-जुलाई का आंदोलन
- आगे क्या देखें
जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन अब और तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर दबाव बढ़ाने के लिए 10 अक्टूबर को एक बड़े धरने की चेतावनी दी है।
मुख्य बातें
मुख्य बातें
- मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी हैं। ETV भारत
- कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े धरने का ऐलान किया है।
- 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में 1,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था।
आज की स्थिति
IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 6 अक्टूबर को छत्रपति संभाजीनगर में प्रेस वार्ता के दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्हें 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले गिरफ्तारी की आशंका है। उन्होंने साफ किया कि उनकी गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन नहीं रुकेगा। पंजाब केसरी
दिपके ने युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली पुलिस रोके तो जहां रोका जाए, वहीं धरना दिया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि CJP के कुछ वॉलंटियर्स को नोटिस मिले हैं, जिनमें यात्रा के खर्च जैसी जानकारी मांगी गई है। यह उनका दावा है, और मुझे इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली।
2 और 3 अक्टूबर को क्या हुआ
प्रभात खबर के अनुसार, 2 और 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर भारी प्रदर्शन हुए और कई कार्यकर्ताओं व नेताओं को हिरासत में लिया गया। प्रभात खबर
शुक्रवार के प्रदर्शन में नेताओं और छात्र कार्यकर्ताओं सहित 1,000 से अधिक लोग हिरासत में लिए गए। हिरासत में लिए गए लोगों में आइसा की नेहा बोरा, आम आदमी पार्टी के नेता-कार्यकर्ता और योगेंद्र यादव शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने उस दिन के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। प्रभात खबर
इसके बाद शनिवार को आइसा कार्यकर्ता कड़ी सुरक्षा के बीच जंतर-मंतर के पास फिर जुटने लगे। पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग की और आसपास के मेट्रो स्टेशनों में आवाजाही अस्थायी रूप से सीमित कर दी गई थी।
हिरासत के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। एक वीडियो में महिला पुलिसकर्मी दो महिला प्रदर्शनकारियों को घसीटकर ले जाती दिख रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2 अक्टूबर के प्रदर्शन के मामले में तीन प्राथमिकी दर्ज हुई हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग और आरोप
प्रदर्शनकारी मतदाता सूचियों के SIR पर चिंता जता रहे हैं और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं। CJP का आरोप है कि SIR और चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि इस्तीफा न होने पर देशभर से समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। ETV भारत
ये प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के आरोप हैं। चुनाव आयोग या ज्ञानेश कुमार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया मुझे अपनी खोज में नहीं मिली।
10 अक्टूबर का धरना
न्यूज़बाइट्स के मुताबिक CJP ने कहा है कि अगर अधिकारियों ने जंतर-मंतर पर मार्च और सभा की अनुमति नहीं दी, तब भी प्रदर्शन जारी रहेगा और जहां रोका जाएगा वहीं धरना होगा। यह CJP का दूसरा बड़ा धरना है। न्यूज़बाइट्स
पहला धरना जुलाई में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ था और करीब एक महीने चला। NEET पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ वह आंदोलन प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ, जिसे CJP ने छात्रों की बड़ी जीत बताया था।
राजनीतिक हलचल
AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले इस्तीफा दे सकते हैं। वनइंडिया हिंदी
यह एक राजनीतिक दावा है और अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। मुझे ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें इस्तीफे की पुष्टि हो या सरकार की ओर से कोई संकेत मिला हो।
पृष्ठभूमि: जून-जुलाई का आंदोलन
विकिपीडिया के अनुसार 6 जून से 25 जुलाई 2026 के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों की श्रृंखला चली। इनमें NEET 2026 पेपर लीक और CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग में अनियमितताओं पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई थी। विकिपीडिया
- 28 जून: सोनम वांगचुक प्रदर्शन में शामिल हुए।
- 20 जुलाई: हजारों छात्र और युवा पुलिस के आदेश के बावजूद संसद की ओर मार्च पर निकले।
- 23 जुलाई: सरकार के आश्वासन के बाद वांगचुक ने भूख हड़ताल खत्म की।
- 25 जुलाई: धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।
आगे क्या देखें
- 10 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर अनुमति देती है या नहीं।
- क्या अभिजीत दिपके या अन्य नेताओं को हिरासत में लिया जाता है।
- चुनाव आयोग की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।
- मेट्रो और ट्रैफिक पर पाबंदियां, जो बड़े प्रदर्शनों में अक्सर लगती हैं।
यह रिपोर्ट अलग-अलग मीडिया स्रोतों पर आधारित है। कई दावे प्रदर्शनकारियों, आयोजकों और राजनीतिक दलों के हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए ताज़ा अपडेट के लिए ऊपर दिए लिंक देखें।

