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भारत में सरकारी स्कूलों की संख्या में गिरावट

भारत में सरकारी स्कूलों की संख्या में गिरावट

Sol Web Media
Last updated: April 22, 2026 3:20 pm
Sol Web Media
5 days ago
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स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर समस्या
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सुना है हम विश्व गुरु बन रहे हैं बिन शिक्षा के

भारत में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर हाल के वर्षों में चिंताजनक रुझान सामने आए हैं। 2020-21 से 2024-25 के बीच देशभर में 18,700 से अधिक सरकारी स्कूल या तो बंद कर दिए गए या फिर उन्हें अन्य स्कूलों में मिला दिया गया। यह आंकड़ा पिछले एक दशक में लगभग 8% की गिरावट को दर्शाता है, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है।

Contents
  • सरकारी स्कूलों की संख्या में गिरावट
  • राज्यों में स्थिति
  • ढांचा और शिक्षकों की कमी
  • निजी स्कूलों की बढ़ती पकड़
  • सरकार पर आलोचना

सरकारी स्कूलों की संख्या में गिरावट

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 में देश में लगभग 11.07 लाख सरकारी स्कूल थे, जो घटकर 2023-24 में करीब 10.17 लाख रह गए हैं। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण कम नामांकन (enrollment), ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का एकीकरण (merger) और संसाधनों का पुनर्गठन बताया जा रहा है। कई ऐसे स्कूल भी हैं जहां छात्रों की संख्या शून्य या बहुत कम है, जिसके कारण उन्हें पास के बड़े स्कूलों में मिला दिया गया।

राज्यों में स्थिति

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में सरकारी स्कूलों की संख्या में अधिक गिरावट दर्ज की गई है। वहीं राजस्थान में स्थिति और भी गंभीर नजर आई, जहां एक दर्दनाक हादसे के बाद राजस्थान हाई कोर्ट ने 86,000 से अधिक जर्जर और असुरक्षित कक्षाओं को बंद करने का आदेश दिया। इससे स्कूलों की आधारभूत संरचना (infrastructure) पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

ढांचा और शिक्षकों की कमी

कई क्षेत्रों में अभी भी ऐसे स्कूल मौजूद हैं जहां 10 से कम छात्र पढ़ते हैं, जो शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों के सही उपयोग पर सवाल उठाते हैं। दूसरी ओर अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में गणित और विज्ञान विषयों के शिक्षकों की कमी को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि स्कूलों की कार्यक्षमता बेहतर हो सके।
देश के 90 हजार सरकारी स्कूल हुए बंद, इस रिपोर्ट ने खोल दी सरकार की पोल ।  Government schools closed

निजी स्कूलों की बढ़ती पकड़

जहां एक तरफ सरकारी स्कूलों की संख्या में गिरावट आई है, वहीं निजी स्कूलों में नामांकन पिछले दशक में लगभग 14% बढ़ा है। यह दर्शाता है कि अभिभावक बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के लिए निजी संस्थानों की ओर रुख कर रहे हैं।

देश में पिछले 5 साल में 18727 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं, यह जानकारी  सरकारी आकड़ों से सामने आई है। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 7767 स्कूलों को  ...

सरकार पर आलोचना

सरकारी स्कूलों का इस तरह बंद होना सिर्फ “रैशनलाइजेशन” का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था की नाकामी को उजागर करता है। जब स्कूलों में छात्र नहीं आ रहे, तो यह सवाल उठता है कि क्या सरकार ने गुणवत्ता सुधारने के लिए पर्याप्त प्रयास किए?

ग्रामीण इलाकों में स्कूलों का विलय बच्चों की पहुंच (accessibility) को और मुश्किल बना रहा है। कई बच्चों को अब दूर-दराज के स्कूलों में जाना पड़ता है, जिससे ड्रॉपआउट का खतरा बढ़ता है।

राजस्थान जैसे मामलों में जर्जर भवनों का मुद्दा यह दिखाता है कि बुनियादी ढांचे पर ध्यान नहीं दिया गया। अगर समय रहते मरम्मत और सुरक्षा उपाय किए जाते, तो ऐसी नौबत नहीं आती।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि सरकारी स्कूलों के कमजोर होने से निजी स्कूलों का वर्चस्व बढ़ रहा है, जिससे शिक्षा धीरे-धीरे महंगी और असमान होती जा रही है। अगर यही स्थिति रही, तो गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाना और कठिन हो जाएगा।
साफ है कि सरकार को केवल स्कूलों को मर्ज करने के बजाय, शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक नियुक्ति और बुनियादी ढांचे पर गंभीरता से काम करना होगा, वरना यह संकट और गहरा सकता है।

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